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Patna Bribery Case: 13 हजार रुपये रिश्वत मामले में तत्कालीन ASI को 3 साल की सजा, 26 हजार जुर्माना

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Patna Bribery Case | बिहटा थाना के तत्कालीन ASI बद्री राम को 13 हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में विशेष अदालत ने तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 26 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।

पटना में रिश्वतखोरी के करीब 15 साल पुराने मामले में अदालत ने तत्कालीन एएसआई बद्री राम को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। मामला बिहटा थाना से जुड़ा है, जहां वर्ष 2011 में एक ट्रक को रिलीज कराने की प्रक्रिया के दौरान 13 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद शुरू हुए मुकदमे में अब फैसला आया है।

ट्रक रिलीज कराने के लिए मांगी गई थी रकम

मामले के अनुसार, उस समय बिहटा थाना में एएसआई के पद पर तैनात बद्री राम ने ट्रक को रिलीज कराने के लिए एमवीआई जांच से संबंधित अनुरोध पत्र भेजने के एवज में 13 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की जांच करते हुए ट्रैप की कार्रवाई की।

2011 में निगरानी टीम ने की थी कार्रवाई

अभियोजन पक्ष के मुताबिक 3 सितंबर 2011 को निगरानी विभाग की टीम ने बद्री राम को 13 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज हुआ और न्यायालय में इसकी सुनवाई शुरू हुई।

10 गवाहों की गवाही और साक्ष्यों पर सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाहों को अदालत के सामने पेश किया। गवाहों के बयान और मामले में पेश किए गए साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी माना।

विशेष अदालत ने सुनाई तीन साल की सजा

निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए बद्री राम को तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी। इसके साथ ही अदालत ने 26 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया।

जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने अतिरिक्त सजा

अदालत के आदेश के अनुसार जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इस तरह करीब 15 साल पहले हुई निगरानी कार्रवाई का मामला अब अदालत के फैसले के साथ एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचा है।

रिश्वत के मामलों में निगरानी कार्रवाई के बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया

सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने से जुड़े मामलों में निगरानी विभाग ट्रैप कार्रवाई करता है। इसके बाद अदालत में गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई होती है। इस मामले में भी 2011 की कार्रवाई के बाद लंबी न्यायिक प्रक्रिया चली और अब दोषसिद्धि के बाद सजा सुनाई गई है।

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बिहार में निगरानी विभाग की ट्रैप कार्रवाई से जुड़े मामलों में अदालत के फैसले के बाद दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मियों पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है।

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